hindi kavita........ (Meri kuch pasandeeda kavitaayein)

Meri kuch pasandeeda kavitayein

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reena


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Posted On: 10 Dec, 2012  
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राजेश कुमारी जी की एक कविता …वो पल

Posted On: 12 Oct, 2012  
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मैंने लिखा पानीपत का दूसरा युद्ध, हुआ सावन के मौसम में Japan Germani बीच हुआ , अठारह सौ सत्तावन में लिख दिया महात्मा बुध , महात्मा गाँधी के चेले थे गाँधी जी के संग बचपन में वो आँख मिचौली खेले थे राणा प्रताप नें गौरी को , केवल दस बार हराया था अकबर नें हिंद महा सागर , अमरीका से मंगवाया था महमूद गजनबी उठते ही , दो घंटे रोज़ नाचता था औरंगजेब रंग में आकर , औरों की जेब काटता था इस तरह अनेकों भावों से , फूटे भीतर के फव्व्वारे जो जो सवाल थे याद नहीं , वे ही पर्चे पर लिख मारे हो गया परीक्षक पागल सा , मेरी copy को देख देख बोला इन सब छात्रों में , बस होनहार है यही एक औरों के पर्चे फेंक दिए , मेरे सब उत्तर छांट लिए Zero नंबर देकर बाकी के सारे नंबर काट लिए …. बहुत बेहतर , मज़ा आया ! आपने साझा किया अच्छा लगा

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: reena reena

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छठी कक्षा से आठवी कक्षा तक तो हमारा भी यही हाल था पर नौवी और दसवी कक्षा में नम्बरों का सवाल था. इतिहास है मजेदार पड़कर देखा बार बार आनंद का है अम्बार अंग्रेजो ने नहीं किया कोई अत्याचार. वो हो हम ही गुलामी पसंद है.... , अच्छी कविता और भविष्य के लिए शुभकामनाए सभ्य समाज की नीव शिष्ट चार और शालीनता पर टिकी हुई है अतः न केवल स्त्री अपितु पुरुष से भी कुछ अपेशायें की जाती है अतः ये दोनों की जिम्मेदारी बनती है की हम नीव को मजबूती दे न की उसे खोखला करे. , , वक्त के साथ जो नहीं बदला वो पीढ़ी, जाती, समाज, हमेशा धूमिल हुआ है, चाहे वो डैनौसर हो या मानवीय सभ्यता, , , पर इसका अर्थ ये नहीं है. की हर चीज को आँख मूंदकर अनदेखा कर दिया जाये. , आजादी का अर्थ है फैसले लेने की आजादी न की अपने आप को बर्बाद करने की आजादी....

के द्वारा: yogeshdattjoshi yogeshdattjoshi

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